indian Naturopathy Training And Research Institute

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    वास्तव में यह सोचनीय विषय है की नित नई दवाएं ईजाद हो रही हैं, नए मेडिकल कालेज खुल रहे हैं औए उनमें से हजारों की संख्या में डॉक्टर निकल रहे हैं , फिर भी रोग और रोगियों की संख्या में वृवास्तव द्धी होती जा रही है | निश्चित रूप से रोगी होने के लिए हम स्वयं जिम्मेदार हैं – अप्राकृतिक आहार,विहार और विचार मूलतः रोगों का कारण है | यदि हम प्राकृतिक जीवन शैली को अपना लें तो बिना किसी दवा या चिकित्सक के पहले सुख का सपना साकार हो सकता है |
        आयुर्वेद का कथन है -” प्रकृति स्मामिक्षस्मरेत ” अर्थात ‘प्रकृति का सदैव अनुसरण करो |” मनुष्यों से दूर जंगल में रहने वाले जीव-जंतु कम बीमार पड़ते हैं और बीमार पड़ने पर जल्द ही स्वस्थ्य हो जाते हैं | उन्हें किसी दवा की जरूरत नही पडती वे कोई टॉनिक नही पीते फिर भी वे मनुष्य से अधिक शक्तिशाली होते हैं | उनकी माँ गर्भकाल में कोई कथित स्वस्थ्य संबर्द्धक औषधियां नही लेती न ही कोई विटामिन/आयरन आदि खनिजों को गोलियों के रूप खाती हैं फिर भी वे बिना किसी सर्जरी,बिना किसी कष्ट के अपने बच्चे को जन्म देती हैं,वह भी ऐसे बच्चे को जो जन्म से ही फुदकने दौड़ने लगे, मनुष्य की तरह कोमल सुकुमार शिशु की तरह नहीं जिसको एक फूल की चोट लगते ही शरीर पर खून की लाली उभर आये | ऐसा इसलिए है की जानवर प्रकृति के सानिध्य में रहते हैं और प्रकृति प्रदत्त भोजन करते हैं |

                                 प्रमुख उद्देश्य

  • प्राकृतिक चिकित्सा, योग, आयुर्वेद, होम्योपैथी एवं यूनानी चिकित्सा के विकास के लिए चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना करना एवं योग व् प्राकृतिक चिकित्सा को जन सामान्य की जीवन शैली में ढालकर व्यक्ति को स्वयं एवं समाज के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना सोसाइटी का प्रमुख उद्देश्य है |
  • नेचर केयर सोसाइटी प्राकृतिक चिकित्सा, योग, एक्यूप्रेशर, चुम्बक चिकित्सा पद्धतियों (जीवन पद्धतियों ) के विभिन्न पाठ्यक्रमों को संचालित करती है | इनका ज्ञान प्राप्त करके व्यक्ति स्वयं स्वस्थ्य रहने की कला सीखकर स्वस्थ्य समाज के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है |
  • प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग के माध्यम से गरीबों,निराश्रितों,असहायों को निःशुल्क चिकित्सा प्रदान करना |
  • प्रकृति के संरक्षण हेतु आवश्यक क्रियाकलापों का सञ्चालन करना |
  • प्राकृतिक संपदाओं जैसे- औषधियों,जड़ी -बूटियों,जल,मृदा,वृक्ष आदि के संरक्षण हेतु लोगों को जागरूक करना एवं अन्य आवश्यक क्रियाकलापों का संपादन करना |
  • ग्राम पंचायत स्तर पर निःशुल्क योग,प्राकृतिक चिकत्सा परामर्श केन्द्रों की स्थापना करना |
  • समय-समय पर निःशुल्क नेत्र रक्षा कैम्प,पोलियो निवारण कैम्प आयोजित करना |
  • समाज के निराश्रितों,मूक-बधिरों,विकलांगों,नेत्रहीनों तथा विधवाओं एवं वृद्धों के लिए कल्याणकारी कार्यक्रम चलाना
  • जूनियर स्तर पर विद्यालयों के पाठयक्रम में योग व प्राकृतिक चिकित्सा विषय को सम्मिलित कराने का प्रयास करना |
  • ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में शिक्षा संस्थानों एवं निःशुल्क औषधालयों का निर्माण व उनके सञ्चालन की व्यवस्था करना
  • कन्या भ्रूण हत्या के विरुद्ध आवश्यक अभियान चलाना |
  • गौ माता संरक्षण के उपाय करना |

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